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Rare Earth Phosphor

 New Phsophor Technology

CaWO4 के द्वारा अधिकतम स्पीड पा लेने के बाद new phosphor technology से अधिक स्पीड प्राप्त हो पायी | 

Intensifying  Screen Speed

किसी Intensifying  Screen की Speed बढ़ाने के तीन तरीके होते है - 

 Thicker Phosphor Layer

Thicker Phosphor Layer, Thin Phosphor Layer की तुलना में अधिक X-ray photon absorb करती है, जिससे स्क्रीन की स्पीड बढ़ती है | 

Par speed CaWO4 screen का जोड़ा 20% x-ray beam को अवशोषित करता है | 

High speed  CaWO4 screen का जोड़ा 40% x-ray beam को अवशोषित करता है | 

Thickness ( ↑ )     →   High speed screen = 2.3 X Par speed screen

लेकिन CaWO4 स्क्रीन की मोटाई एक सीमा से अधिक नहीं बढ़ाई जा सकती है, क्योंकि इससे लाइट डिफ्यूजन के कारण image sharpness बढ़ती है |

Conversion efficiency

Rare Earth intensifying screen सन 1973 से commercially available है | यह रेयर अर्थ मेटल्स से बनी होती है इसलिए इन्हें रेयर अर्थ स्क्रीन कहते हैं | इनमें मुख्यतया Lanthanum (La) तथा Gadolinium (Gd)  रेयर अर्थ फॉस्फर के रूप में उपयोग में लिए जाते हैं |

Rare earth phosphor terbium-activated gadolinium oxysulfide (Gd2O2S:Tb) तथा  Thulium activated lanthanum oxybromide (LaOBr :Tm) के crystalline powder से बनायीं जाती है | 

CaWO4 की तरह Rare earth phosphor अपने प्योर फॉर्म में या शुद्ध रूप में फ्लोरोसेंस गुण नहीं दर्शाते हैं | इसके लिए इनमें बहुत कम मात्रा में अशुद्धि मिलाई जाती है जिन्हें activator कहते हैं | उदाहरण के लिए Gd2O2S में 0.3%  Gd atom को Tb atom से प्रतिस्थापित किया जाता है | 

Rare earth phosphor की conversion efficiency, CaWO4   से अधिक होती है | 

 CaWO4  → 5%

Rare Eearth Phosphor → 20%

LaOBr :Tm → 18%

Gd2O2S:Tb → 18%

Y2O2S:Tb  → 18% (Yttrium Oxysulfide)

Higher absorption 

CaWO4  फॉस्फर के लिए X-ray beam के अवशोषण की दर निम्नानुसार होती है | 

Parspeed screen → 20%

High speed screen → 40% → due to increased phosphor layer thickness

Rare earth screen → 60% → Due to improvement in absorption characteristics.

CaWO4 Screen के द्वारा X-ray अवशोषण 


Diagnostic energy range में high atomic number atom screen/phosphor में एक्सरे फोटोन का अवशोषण पूरी तरह से photoelectric effect के द्वारा होता है | 

ElementAtomic NumberK-shell binding energy
Yttrium (Y)3917.05 KeV
Barium (Ba)5637.4 KeV
Lanthanum (La)5738.9KeV
Gadolinium (Gd)6450.2KeV
Tungsten (W)7469.5KeV
Molybdenum (Mo)4220 KeV


CaWO4 तथा Gd2O2S
K-edge 
   Gd → 50.2 keV
    W → 69.5 keV 
50 KeV तक दोनों फॉस्फर एक सामान x-rays अवशोषित करते है | लेकिन Gd का K-edge 50.5 keV होता है, जिससे कि rare earth phosphor (Gd2O2S)  यहाँ CaWO4 से 4-5 गुना ज्यादा एक्सरे अवशोषित करता है | 
CaWO4 तथा Gd2O2S के द्वारा X-ray अवशोषण 

यह तब तक होता है जब तक की 70 keV पर W का K-edge नहीं आ  जाता है | अतः कम परमाणु क्रमांक होते हुए भी Gd को 50 - 70 kVp तक W से ज्यादा एक्सरे अवशोषण होने का फायदा होता होता है , लेकिन डायग्नोस्टिक एनर्जी रेंज पर एक्सरे  बीम में 50 keV से कम एक्सरे का प्रतिशत अधिक होता है | अतः इस फॉस्फर में Lanthanum (La) मिलाया जाता है | 

    La K-edge → 38.9 keV

 यह  39 - 50 keV रेंज के पास होता है | जिससे ज्यादा एक्सरे का अवशोषण होता है | 

Y2O2S

CaWO4 तथा  Y2O2S की तुलना करने पर दोनों के द्वारा 17 keV से 70 keV तक एक्सरे अवशोषण लगभग एकसमान होता है | लेकिन Y2O2S ज्यादा लाइट फोटोन उत्पन्न करता है, क्योकि Y2O2S की X-ray to light conversion efficiency ज्यादा होती है  |
Y2O2S के द्वारा X-ray का अवशोषण 


X-ray to light conversion efficiency
 Y2O2S → 18%
CaWO4 → 5%



Other Links
Radiography Notes - Radiography in Hindi
MCQs of Radiography - X-ray Quiz
All Previous Year Solved Radiology Papers - Radiography Papers
Recorded Live Classes - Medical Imaging Classes

Speed of Intensifying Screen

Intensifying screen की स्पीड को बहुत से कारक निर्धारित करते है | जो की निम्न है -
  • Thickness of phosphor layer
  • Size of the phosphor crystal 
  • Presence or absence of light absorbing dye in phosphor layer
  • Phosphor conversion efficiency
        Calcium tungstate screen की स्पीड तथा इसकी detail record करने की क्षमता एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होती है | अर्थात high speed film से less detail प्राप्त होती है | Intenisfying screen को Fast, Medium (Par speed) तथा slow (Detail) speed screen के रूप में वर्गीकृत किया जाता है | 
Intensification factor of Intensifying Screen
S. N. Screen Intensification Factor
1 Fast Speed Screen 100
2 Medium (Par) speed Screen 50
3 Slow (Detail) Speed Screen 25

        Phosphor layer की thickness बढ़ाने पर screen fast हो जाती है, क्योकि thick layer ज्यादा X-ray photon absorb करती है | लेकिन इस से image की clarity कम हो जाती है | यह image clarity में कमी phosphor layer में इमेज के विसरण (diffusion) के कारण होती  है  | 



        Phosphor crystal के द्वारा उत्सर्जित प्रकाश (light) सभी दिशाओ में विकिरित होता है, यहाँ इस लाइट के द्वारा फिल्म को क्रिस्टल साइज से अधिक भाग एक्सपोज़ होता है | इसके अलावा screen me में भी कुछ लाइट की scattering होती है | 

        अगर X-ray film पर beam के आधे भाग को lead block से ढक दे तो fast screen में लाइट diffusion से image blur अधिक होता है | इसके अलावा light diffusion को रोकने के लिए screen में एक लाइट absorbing substance मिलाया है | यह साधारणतया yellow dye होती है | 



        Film के पास उत्सर्जित होने वाला लाइट फोटोन जल्दी से कम दुरी तय करके फ़िल्म को एक्सपोज़ कर देता है, जबकि ज्यादा दुरी पर उत्सर्जित होने वाला photon को फिल्म तक पहुंचने के लिए अधिक दुरी तय करनी पड़ती है, जिससे उसके अवशोषित होने की सम्भावना बढ़ जाती है | लेकिन light absorbing dye से स्क्रीन की स्पीड कम हो जाती है, क्योकि यह उत्सर्जित लाइट की मात्रा को घटाती है | 



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Intensifying Action of Screen

    Intensifying screen का मुख्य कार्य इसमें से गुजरने वाले x-ray photon को लाइट फोटोन में परिवर्तित  करना है | 

Intrinsic Conversion Efficiency : 

    किसी इंटेंसिफाइंग स्क्रीन की वह क्षमता / दर  जिससे की स्क्रीन में काम में लिया गया phosphr, उस पर गिरने वाले एक्स-रे फोटोन को light photon  में कन्वर्ट करता है, Intrinsic Conversion Efficiencyकहलाती है | 

Intrinsic Conversion Efficiency 
            = Light energy liberated by phosphor crystal /  X-ray energy absorbed by crystal

    Calcium tungstate की Intrinsic Conversion Efficiency 5% होती है | अगर अवशोषित एक्स-रे फोटोन की एनर्जी तथा emitted light photon की wavelength तथा phosphor की कन्वर्जन एफिशिएंसी पता हो, तो निकलने वाले लाइट फोटोन की संख्या का पता लगाया जा सकता है | 
Question :  माना किसी कैल्शियम टंगस्टेट इंटेंसिफाइंग स्क्रीन के द्वारा 500 KeV एक्स-रे फोटोन का अवशोषण करके 4300Å wavelength की लाइट फोटोन का उत्सर्जन किया जाता है तो उत्सर्जित लाइट फोटोन की ऊर्जा व संख्या ज्ञात करो | 
Answer : 
                                𝜆 = 12.4 / KeV             यहाँ  𝜆 = 4300Å
                                KeV = 12.4 / 𝜆
                                KeV = 12.4 / 4300Å
                                KeV = 0.003
                                 eV = 3
अतः 4300Å के एक light photon की ऊर्जा 3eV होगी | 
Photon की संख्या = 50000Kev  / 3eV = 17000 फोटोन होगी | 
क्योंकि कैल्शियम टंगस्टेट की conversion efficiency 5 % होती है, अतः वास्तविक रूप से उत्सर्जित लाइट फोटोन 
= 17000X0.05 = 850 photon
आजकल काम में लिए जाने वाले फॉस्फर की conversion efficiency 20% तक होती है,अतः इनसे बनी स्क्रीन की स्पीड अधिक होती है | 

Screen Efficiency : 

किसी फॉस्फर के द्वारा उत्सर्जित लाइट का स्क्रीन से निकलकर फिल्म को एक्सपोज़ करने की क्षमता screen efficiency कहलाती है | एक typical screen में उत्पन्न लाइट फोटोन के आधे ही फिल्म तक पहुंच पाते है, बाकि स्क्रीन में अवशोषित हो जाते है | ऊपर दिए गए प्रश्न में 850 लाइट फोटोन में  से आधे ही X-ray film तक पहुंच पाते है | 

अतः एकसमान ऊर्जा के 1000 X-ray photon से X-ray film को direct expose करने पर 50 latent image center बनते है, तथा film-screen system लेने पर 1700 latent image center बनते है | इस प्रकार intensifying screen में लगभग 34 गुना ज्यादा latent image center बनते है | अतः केवल film से समान मात्रा में latent image center बनाने के लिये  34 गुना ज्यादा exposure या mAs की आवश्यकता होती है | अतः intensifying screen के उपयोग से patient exposure को बहुत अधिक मात्रा में घटाया जा सकता है | 

Intensification Factor

 किसी intensifying screen का intensification factor उसके द्वारा एक्सपोज़र में की गई कमी को बताता है | अतः किसी x-ray film पर intensifying screen के उपयोग तथा बिना उपयोग के एकसमान density उत्पन्न करने के लिये आवश्यक एक्सपोज़र का अनुपात intensification factor कहलाता है | 
    Intensification Factor = 
                Exposure required when screen are not used / Exposure required with screen
Calcium tungstate के लिए kVp के साथ-साथ intensification factor बढ़ता है | 
K-absorption edge of Ag and Br in film emulsion
                                    Ag - 26KeV
                                    Br - 13KeV
K-absorption edge of W is 
                                    W - 69.5KeV
इंटेंसीफिकेशन फैक्टर


अतः low KVp x-rays का photoelectric absorption film में अधिक होता है, क्योकि Ag व Br का low K-absorption edge होता है | जबकि screen photoelectric effect के कारण high kVp Xrays ज्यादा अवशोषित होती है, क्योकि tungsten का K-edge अधिक होता है |  
इसी कारण से -
  • एक ऐसी filtered x-ray beam जिसमे low kVp X-rays कम हो (Heavily filtered X-ray beam) के लिए स्क्रीन का intensification factor अधिक होता है | 
  • Thick body part जैसे की lumbar spine की radiography के दौरान intensifying screen ज्यादा fast होती है, क्योकि thick body part ज्यादा low kVp X-rays को हटा देता है | 
Screen -film system पर X-ray beam डालने पर लगभग 3-4% x-ray photon, direct x-ray film के द्वारा अवशोषित हो जाते है | इस direct action से बहुत कम latent image center बनते है जिन्हे ignore किया जा सकता है | 




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Calcium Tungstate Phosphor

    सबसे पहले intensifying screen में काम में लिया गया phosphor calcium tungstate (CaWo4) था |  प्राकृतिक  calcium tungstate को उपयोग में नहीं लाया जाता है क्योकि sodium tungstate तथा calcium chloride के उपयोग से बेहतर गुणवत्ता का synthetic calcium tungstate बनाया जाता है | 

Na2WO4 + CaCl2 ------> CaWO4 + 2NaCl

    सबसे पहले calcium tungstate scren, सन 1896 में Germany तथा England में बनायीं गई | US में इसका सर्वप्रथम निर्माण 1912 में किया गया | Fluoroscence के लिया calcium tungstate क्रिस्टल को एकदम शुद्ध रूप में काम में लिया जाता है |  
       Calcium tungstate के द्वारा spectrum के blue region की लाइट का उत्सर्जन किया जाता है |  इस उत्सर्जित लाइट की तरंगदैर्ध्य 3500Å- 5800Å (350-580nm) तथा peak wavelengh 4300Å (430nm) होती है | यह रेंज आँखों को vilot color के रूप में दिखाई देती है | यधपि मानव की आँखे इस wavelength के प्रति संवेदनशील नहीं होती है, लेकिन X-ray film emulsion इस wavelength range के प्रति अधिकतम संवेदनशीलता (maximun sensitivity)  दर्शाता है  |


इस चित्र से स्पष्ट है की intensifying screen के द्वारा उत्सर्जित  प्रकाश के प्रति film की sensitivity अधिकतम होती है | अतः film maximum photographic effect प्रदर्शित करती है | 
 X-ray Film red light के प्रति संवेदनशीलता (photosensitivity) प्रदर्शित नहीं करती है, अतः red light को darkroom में उपयोग में लाया जाता है  | 




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STORAGE OF UNEXPOSED XRAY FILM

storage of unexposed xray film
Film emulsions, heat, humidity तथा कुछ केमिकल के प्रति sensitive होता है | इसलिए unexposed xray film storage के लिए कुछ विशेष सावधानियां रखी जाती है | 
एक्सरे फिल्म का स्टोरेज मेटल बॉक्स या जमीन से दो फुट ऊपर अलमारी की शेल्व्ज़ या double wall के कैबिनेट जिसके बाहरी दिवार में हवा प्रवाहित होती हो, में होनी चाहिये | 
एक्सरे फिल्म को एक ठन्डे (idle temperature 55° F), सूखे (relative  humidity  below  60  percent) स्थान पर रखा जाता है |

एक्सरे फिल्म Gases (जैसे- formaldehyde, hydrogen sulfide, sulfur dioxide, ammonia, illuminating gas, engine exhaust) तथा vapors (from solvents, mothballs, cleaners, turpentine, mildew and fungus preventives, and mercury) आदि के प्रति सेंसिटिव होती है | ये इमल्शन की सेंसिटिविटी को परिवर्तित कर देते है | अतः एक्सरे फिल्म को इनसे दूर रखा जाना चाहिए | 
अगर फिल्म को 6 महीने से ज्यादा समय तक स्टोर किया जाता है तो इन्हे फ्रीज (-18° C से -23°C )  किया जा सकता है लेकिन इन्हे काम में लेने से पहले इन्हे धीरे धीरे सामान्य तापमान तक  लाया जाता है | जिससे इमल्शन की परतो के रोल होने को रोक देता है |

एक्सरे फिल्म cosmic radiaiton के प्रति सेंसिटिव होती है ये कॉस्मिक रेडिएशन हर जगह पायी जाती है  | ये कॉस्मिक रेडिएशन एक्सरे फिल्म पर fog उत्पन्न करता है | फिल्म फोग कई कारण से हो सकता है जिनमे स्कैटर रेडिएशन, रेडियोग्राफ का लाइट से एक्सपोज़ होना तथा एक्सपोज़र से पहले फिल्म का रेडिएशन से एक्सपोज़ होना शामिल है |  अतः एक्सरे फिल्म को इस natural background radiation से दूर रखा जाता है |
जिस कमरे में एक्सरे फिल्म का स्टोरेज होता है वह कमरा रेडिओग्राफी रूम से दूर होना चाहिए | 
फिल्म इमल्शन प्रेशर के प्रति भी सेंसिटिव होता है अतः फिल्म स्टोरेज के लिए एक्सरे फिल्म के डिब्बों को एक के ऊपर एक नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि बुकसेल्फ में बुक की तरह खड़ा रखा जाना चाहिए | 






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X RAY ARTIFACTS

रेडियोग्राफ पर उपस्थित वो structure या appearance जो रेडियोग्राफ़ीक इमेज का भाग नहीं होती है तथा किसी कृत्रिम प्रभाव से उत्पन्न होता है artifacts कहलाते है |
An artifact is a structure or an appearance that is not normally present on the radiograph and is produced by artificial means.
 Radiographic Errors, Technical तथा processing errors होते है | Technical errors रेडिओग्राफ को उत्पन्न करने की तकनीक में एरर के कारण होते है |  प्रोसेसिंग एरर एक्सरे फिल्म की प्रोसेसिंग से सम्बंधित होते है |किसी फिल्म पर आर्टिफैक्ट्स उत्पन्न होने के निम्न कारण हो सकते है-
  • Improper handling of x ray film packet.
  • Film processing के दौरान accidental incidents.
  • Manufacturing defects in x ray film or packets.
  • Movement of xray tube, film or patient may produce film artifacts.

Radiographic Errors and artifacts on the x ray film

Distorted images 

यह एक्सरे ट्यूब, ऑब्जेक्ट या फिल्म के improper alignment के कारण उत्पन्न होता है | इसमें body anatomy के अलग अलग भाग में असमान आवर्धन (magnification) उत्पन्न हो जाता है | यह वर्टीकल या हॉरिजॉन्टल दो प्रकार का होता है |
distortion artifacts

Elongation -इसमें बॉडी पार्ट की इमेज में लम्बाई बढ़ जाती है |
Foreshortening - इसमें बॉडी पार्ट की लम्बाई कम दिखाई देती है |


Finger marks 

finager marks artifacts on x ray film

एक्सरे फिल्म का सही तरीके से रख रखाब नहीं किया जाये तो तो उन पर अंगुलियों के निशान बन जाते है | अगर एक्सरे फिल्म पर डेवलपर से भीगी अंगुलियों से टच करे तो dark figer marks बन जाते है | अगर अंगुलियों पर फ़िक्सर लगा होता है तो फिल्म पर clear finger marks बन जाते है | फिल्म पर fluoride के stannous तथा गंदगी (dirt) के चिकनाई (grease) युक्त निशान बन जाते है |

Blurred images

buller artifacts

एक्सरे एक्सपोज़र के दौरान यदि पेशेंट या एक्सरे ट्यूब हिल जाये तो एक्सरे फिल्म पर motion artifacts उत्पन्न हो जाते है तथा एक्सरे फिल्म पर उपस्थित इमेज धुंधली (blured)  दिखाई देती है |

Dark or light films in visible images

underexposure or over exposure artifacts

अगर एक्सपोज़र फैक्टर कम हो या एक्सरे फिल्म से फोकस डिस्टेंस  बढ़ जाये तो तो फिल्म लाइट या under exposure कहलाती है तथा अगर एक्सपोज़र फैक्टर सामान्य से ज्यादा हो या एक्सरे फिल्म की फोकल स्पॉट से दुरी कम हो जाये तो एक्सरे फिल्म black या over exposure कहलाती है |
Completely clear film 
यह निम्न कारणों से हो सकती है -
  • Machine not switched on
  • Malfunction of machine-machine  सही से काम ना करे | 
  • Placing film in fixer before developer solution- एक्सरे फिल्म को डेवलपर में डालने से पहले सीधे ही फ़िक्सर में डाल दिया जाये | 
  • Film not taken / exposed-फिल्म रेडिएशन से एक्सपोज़ ही 

Cone cutting

cone cutting artifacts on xray film

रेडिएशन बीम एक्सरे फिल्म को पूरी तरह से कवर न करे तो उसे cone cutting artifacts कहते है | यह एक्सरे बीम तथा फिल्म के improper alignment के कारण होता है |

Back scatter or cassette upside down

Back scatter or cassette upside down artifacts

यह कैसेट के उल्टा लग जाने से होता है अथार्थ कैसेट को ट्यूब साइड निचे तथा बैक साइड ट्यूब की तरफ होता है |

Double exposure

double exposure artifacts on xray film

इस तरह के आर्टिफैक्ट्स में एक ही एक्सरे फिल्म दो बार रेडिशन से एक्सपोज्ड हो जाती है |

Static electricity artifacts

static artifacts on radiograph

अगर एक्सरे फिल्म को बलपूर्वक उसके wrapper paper से निकाला जाये तो ये आर्टिफैक्ट्स बनते है | इसमें ट्री जैसी स्ट्रक्चर बन जाती है |

Crescent shaped black lines 

यह एक्सरे फिल्म पर नाखून के दबाव (fingernail pressure) के कारण बनते है |

Reticulation 

radiograph showing reticulation artifacts

जब अलग अलग प्रोसेसिंग सोल्युशन जैसे डेवलपर, फ़िक्सर या वाटर के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर हो तो इमल्शन समय के साथ साथ सिकुड़ जाता है इसे reticulation कहते है | Reticulation के लिए इन प्रोसेसिग्न सोल्युशन में 15°C से ज्यादा का अंतर होना चाहिए |

Undeveloped / clear area on film

  • Incomplete immersion of film in developer - linear gray levelsफिल्म पूरी तरह से डेवलपर में ना डूब पाए | यह लगभग एक्सरे फिल्म के ऊपरी किनारो पर एक लाइन के रूप में देखने को मिलता है  |
  • Films overlapping during processing -प्रोसेसिंग के दौरान एक्सरे फिल्म एक दूसरे पर ओवरलैप हो जाये तो एक दूसरे पर चिपका भाग डेवेलप नहीं हो पाता है |  
  • Fixer on operators hands- अगर ऑपरेटर के हाथ पर फ़िक्सर लगा हो तो फिल्म का वह भाग जहा फ़िक्सर लगा होगा वह डेवेलप होने से पहले ही सिल्वर हेलाइड हट जाता है तथा वह फिल्म पर clear finger prints के रूप में दिखाई देता है | 
  • Cone cutting यह एक्सरे फिल्म पर एक राउंड या स्ट्रैट लाइन के रूप में दिखाई देता है यह तब बनता है जब एक्सरे बीम फिल्म को पूरी तरह से कवर ना करे | 
  •  Film not exposed अगर फिल्म एक्सपोज़ ना हो तो उसे डेवलपर में डालने पर वह एक दम पारदर्शक दिखाई देती है |  

Scratched film

Scratch artifacts showing radiograph

प्रोसेसिंग के दौरान इमल्शन soft होता है | इस समय लापरवाही से हैंडल करने से इस पर नाख़ून या अन्य किसी धार वाले ऑब्जेक्ट से  Scratch mark बन जाते है |

Get solved paper of RPMC and RUHS : https://radiographypapers.blogspot.com

Black borders

डार्क रूम मे एक्सरे पैकेट खुले हो तथा एक दौरान इनमे लाइट प्रवेश कर जाये या प्रोसेसिंग के दौरान फिल्म पर लाइट गिर जाये तो उसके बॉर्डर या पूरी फिल्म ब्लैक हो जाती है |  .

 Streaks

rollar artifacts on xray film

  • अगर फिल्म हेंगर को सही तरीके से धोया ना जाये  तो फिल्म पर डेवलपर या फ़िक्सर एक लाइन के रूप में आर्टिफैक्ट बनाता है | 
  • Dirty rollers अगर फिल्म के रोलर सही तरीके से साफ न हो तो रोलर आर्टिफैक्ट बनते है | 
  • Automatic processor में हीटिंग पैड सही तरीके से काम न करे तो स्ट्रीक आर्टिफैक्ट बनते है | 

Radiolucent spots

  • अगर फिल्म पर डेवलपर की कोई ड्राप गिर जाये तो वह एक डार्क एरिया बन जाता है |  
  • Powder from the gloves - अगर ग्लव्स से पाउडर फिल्म पर गिर जाये तो एक्सपोज़र के दौरान इंटेन्सीफायिंग स्क्रीन से लाइट फिल्म तक नहीं पहुंच पाती है अतः वह एरिया अंडरएक्सपोज़ रह जाता है | 
  • Developer chemicals properly dissolve न हो तो भी एक्सरे फिल्म पर radiolucent spot बन जाते है | 

Brown film

stanous brown artifacts on xray film

यदि एक्सरे फिल्म को फ़िक्सर सोल्युशन में पर्याप्त समय के  लिए नहीं डाला जाये या सही तरीके से साफ पानी से साफ की जाये तो समंय के साथ एक्सरे फिल्म पर ब्राउन स्टैन बन जाते है |
आटोमेटिक प्रोसेसिंग में भी अगर फ़िक्सर पूरी तरह से काम आ चूका (exhausted fixer solution) हो तो फिल्म पर ब्राउन स्टैन बन जाते है | शुरुवात में रेडिओग्राफ एकदम नार्मल दिखाई देता है |

Completely Black film 

यदि पूरी फिल्म लाइट से एक्सपोज़ हो जाये तो पूरी तरह से ब्लैक हो जाती है |

Matellic artifacts

xray film showing metallic artifacts

Ear rings, nose rings, (metal) dentures, eye glasses आदि एक्सरे फिल्म पर आर्टिफैक्ट्स उत्पन्न करते है अतः रेडियोग्राफी से पहले इन्हे निकलवा लेना चाहिए |






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MANUAL PROCESSING OF X RAY FILM

MANUAL PROCESSING OF X RAY FILM

जब एक एक्स रे फिल्म को लाइट के द्वारा एक्सपोज किया जाता है तो इस पर एक latent image बनती है |  इस इनविजिबल लेटेंट इमेज से विज़िबल रेडियोग्राफिक इमेज उत्पन्न करने के लिए इसे प्रोसेस किया जाता है | यह इमेज परमानेंट होती है तथा इसे बिना किसी क्षय के वर्षों तक रखा जा सकता है |
MANUAL PROCESSING OF X RAY FILM

Film processing वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लेटेंट इमेज को विजिबल इमेज में बदला जाता है | डार्करूम में डेवलपर टैंक left side में होता है तथा रिंसिंग टैंक बीच में होता है | फिक्सिंग टैंक right side में होता है | डेवलपर को इसकी साबुन जैसी (soapy feel) से पहचाना जा  सकता है | फ़िक्सर को इसकी सिरके जैसी गंध (vinegary odor) तथा एसिडिक टेस्ट से पहचाना जाता है | प्रोसेसिंग प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं जिनमे developing, rinsing, fixing, washing तथा drying  शामिल है | 
प्रोसेसिंग प्रक्रिया में शामिल पद निम्न है-

Exposure 

इस प्रक्रिया में Latent image का निर्माण होता है | एक्सरे फिल्म पर फोटोसेंसिटीव सिल्वर हेलाइड इमल्शन का लेप किया गया होता है | एक्सरे एक्सपोज़र से ये इमल्शन लेयर एनर्जी पाकर एक लटेंट इमेज का निर्माण करती है जिसे अपनी आँखे देख नहीं पाती है | इस लेटेंट इमेज को विज़िबल इमेज में बदलना फिल्म प्रोसेसिंग कहलाता है |

Development

इस प्रक्रिया में लटेंट इमेज को black metallic silver में बदला जाता है | यह एक chemicl reaction है जो latent image को विज़िबल इमेज में बदलने के लिए लाखों गुना बढ़ा देती है | इसमें बेसिक क्रिया सिल्वर आयन का अपचयन (reduction) होना होता है जिससे यह black metallic silver में बदल जाता है |  
Ag+ + e- → Ag
Developer एक reducing agent होता है | यह एक all-or-none phenomenon होता है अथार्थ या तो ग्रेन पूरा डेवेलप होता है या बिलकुल भी नहीं | डेवलपिंग प्रक्रिया सिल्वर हेलाइड ग्रेन के sensitivity speck पर शुरू होती है | 
developer scale time and temperature


यह माना जाता है की किसी सिल्वर हेलाइड ग्रेन में उपस्थित metallic silver, डेवलपर सोल्युशन को डेवलपिंग एक्शन शुरू करने के लिए प्रेरित करता है | अगर किसी metallic silver युक्त सिल्वर हेलाइड ग्रेन में लेटेंट इमेज नहीं हो तो भी वह डेवलपिंग क्रिया दर्शाता है, लेकिन यह क्रिया बहुत ही धीमी दर से होती है | 
एक्सरे फिल्म को डेवलपर सोल्युशन  टैंक में डुबोया जाता है तथा एक दो बार उसे ऊपर निचे किया जाता है | इसके बाद फिल्म को डेवलपमेंट के लिए टैंक में छोड़ दिया जाता है |  Developing process का संबसे मूलभूत करक time है | डेवलपमेंट के लिए आदर्श टाइम 68℉ पर 5 min होता है | डेवलपमेंट टाइम, डेवलपर सोल्युशन के तापमान पर निर्भर करता है | डेवलपमेंट टाइम, डेवलपर सोल्युशन के तापमान बढ़ने के साथ साथ घटता है | 15℃ पर डेवलपमेंट टाइम लगभग 7min, तथा 23℃ पर लगभग 3min होता है | समय के साथ साथ डेवलपर सोल्युशन की कंसन्ट्रेशन धीरे धीरे कम होने लगती है | 

Rinsing or Wash [stop bath]

जब फिल्म को डेवलपर सोल्युशन से बाहर निकला जाता है तो फिल्म इमल्शन soft तथा swollen होता है तथा उस पर डेवलपर केमीकल भी लगा होता है | एक्सरे फिल्म को फ्रेश रनिंग वाटर में 10 से 15 sec के लिए डूबाते है |  यह प्रक्रिया rinsing कहलाती है | रिंसिंग प्रक्रिया से एक्सरे फिल्म पर चिपके soluble chemical को हटाया जाता है | डेवलपर एक्शन क्षारीय माध्यम में होती है अतः रिंसिंग प्रक्रिया में क्षारीय माध्यम के अभाव में डेवलपिंग एक्शन भी रूक जाता है |

अनएक्सपोज्ड सिल्वर हेलाइड ग्रेन पानी में घुलनशील नहीं होते है अतः वे एक्सरे फिल्म पर ही चिपके रहते है | अगर फिल्म प्रोसेसिंग से रिंसिंग प्रक्रिया को हटा दिया जाये तो एक्सरे फिल्म पर उपस्थित अवशेष base, fixing solution में चला जायेगा जिससे फ़िक्सर की acidity, acid-base reaction के कारण उदासीन हो जाएगी | जिससे फ़िक्सर की fixing तथा hardening action प्रभावित होगी, तथा एक्सरे फिल्म पर कुछ ही हफ्तों में brown stain बन जायेंगे |
एक्सरे फिल्म इमल्शन सॉफ्ट होता है अतः हार्डनिंग प्रक्रिया के अभाव में उस पर आसानी से scratches बन सकते है |
एक्सरे फिल्म पर अभी भी अनएक्सपोज्ड सिल्वर हेलाइड ग्रेन लगे होते है अतः उसे फ़िक्सर में सेफ लाइट के निचे स्थान्तरित करना चाहिए वरना फिल्म फोग का निर्माण हो जायेगा |
Note- automatic film processing में "squeegy" rollers एक्सरे फिल्म पर उपस्थित केमिकल को हटा देते है अतः इसमें rinsing  प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है | 

Fixing and Hardening

Fixing solution, unexposed तथा undeveloped silver halide crystals को एक्सरे फिल्म इमल्शन से हटाता है तथा इमल्शन को वापस हार्ड बनाता है | मैन्युअल प्रोसेसिंग में अगर डेवलपमेंट टाइम X sec हो तो फिक्सिंग टाइम 2X sec तथा फाइनल रिंसिंग टाइम 3X sec रखा जाता है | 

Final wash or Washing

Fianl wash के  द्वारा एक्सरे फिल्म पर उपस्थित प्रोसेसिंग प्रोडक्ट जैसी acid, residual fixer को हटाया जाता है | अगर वाशिंग प्रक्रिया सही से न हो लम्बे समय में एक्सरे फिल्म ब्राउन कलर की हो जाती है |  

Drying

Wet film को सही से हैंडल नहीं किया जाये तो वह  scratching तथा abrasion से डैमेज हो सकती है | एक्सरे फिल्म को डार्करूम में एक रैक पर लटका कर सुखाया जाता है इनके निचे एक dip tray होती है जिसमे फिल्म से पानी टपक कर निचे गिरता रहता है |  फिल्म को सुखाने के लिए फैन भी काम में लिया जाता है | Cabinet dryer में फैन के साथ एक हीटिंग एलिमेंट भी लगा होता है |







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SILVER RECOVERY FROM WASTE FIXER

                        Waste photographic film में 1.5 से 2.0 पर्सेंट तक ब्लैक मैटेलिक सिल्वर होता है | जिसको रिकवर किया जाता है तथा उपयोग में लिया जाता है | सिल्वर एक कीमती धातु होती है,  तथा इसका ज्वेलरी, डेंटिस्ट्री, फोटोग्राफी, मिरर्स, ऑप्टिकस तथा इंडस्ट्रीज में बहुत ही व्यापक रूप से उपयोग होता है |
                          अतः सिल्वर की रिकवरी इंडस्ट्रियल, केमिकल व इकोनॉमिकल रूप से फायदेमंद होती है |एक फोटोग्राफी फिल्म की कीमत का अधिकांश भाग सिल्वर का होता है | प्रत्येक फिल्म वो चाहे फोटोग्राफिक फिल्म हो या एक्सरे फिल्म, प्रत्येक पर सिल्वर की पतली परत चढ़ी होती है |
SILVER RECOVERY FROM WASTE FIXER

                          इमेज फॉरमेशन के दौरान सिल्वर का कुछ भाग फिक्सिंग सॉल्यूशन में आ जाता है |  जैसे जैसे इस सोल्युशन में बहुत सारी फिल्में प्रोसेस की जाती है, फिल्म से सिल्वर का एक बहुत बड़ा भाग फिक्सिंग सॉल्यूशन में घुल जाता है | जब यह सिल्वर फिक्सिंग सॉल्यूशन में सचुरेशन लेवल तक पहुंच जाती है तो उसके बाद इस सलूशन में आगे फिल्म की फिक्सिंग नहीं की जा सकती है | हाइपो या फिक्सिंग सॉल्यूशन में सिल्वर की कंसंट्रेशन प्रोसेस टू प्रोसेस और टाइम टू टाइम पर निर्भर करती है |

Read : Constituents of Developer and Fixer

                    फिल्म प्रोसेसिंग के दौरान फिल्म पर उपस्थित सिल्वर,  हाइपो से क्रिया करके सिल्वर थायोसलफेट आयन कंपलेक्स आयन बनाता है | यह सिल्वर को ट्रैप कर लेता है |  सिल्वर रिकवरी के दौरान इस कंपलेक्स आयन से सिल्वर को हटाया जाता है |  
                           हाइपो सॉल्यूशन में सिल्वर बहुत अधिक मात्रा में होता है |  यह 6 से 10 ग्राम पर लीटर की मात्रा में उपस्थित होता है | इसकी सांद्रता को सिल्वर ऐस्टीमेशन पेपर की सहायता से जांचा जा सकता है | यह सिल्वर टेस्टिंग प्रोसेस बहुत ही सिंपल होता है | इसमें एक छोटे सिल्वर ऐस्टीमेशन पेपर को हाइपो सॉल्यूशन में डुबोते हैं, जिससे इसके कलर में परिवर्तन होता है | इस परिवर्तित रंग की तुलना पहले से दिए गए कलर चार्ट से कर ली जाती हैं | इस तरीके से सिल्वर कंसंट्रेशन ग्राम पर लीटर में प्राप्त होती है, तथा यह प्रोसेस 10 सेकंड से भी कम समय का होता है |

हाइपो से सिल्वर एक्सट्रैक्शन करने के कई तरीके होते हैं-

Chemical Method

                        इसके लिए सबसे पहले सिल्वर ऐस्टीमेशन पेपर की सहायता से सिल्वर की सांद्रता ग्राम पर लीटर में पता कर लेते हैं | अब इस वेस्ट फ़िक्सर का 1 लीटर सॉल्यूशन लेते हैं | इसमें इतनी ही मात्रा में सोडियम सल्फेट,  सोडियम सल्फाइड तथा कास्टिक सोडा डालते हैं | अब इस सलूशन से कॉमन आयन प्रभाव के आधार पर  सिल्वर अलग हो जाती है |  सिल्वर एक ब्लैक रेसिड्यू के रूप में तली पर बैठ जाती है | तथा ऊपर का सॉल्यूशन पीले रंग का होता है | इसे फिल्टर पेपर की सहायता से छान लिया जाता हैं, तथा नीचे के ब्लैक रिजर्व को सुखा लेते हैं | तथा इसे भट्टी में पिघला लिया जाता है | पिघलाने  के दौरान इसमें बोरेक्स पाउडर, सोडियम कार्बोनेट तथा कैलशियम कार्बोनेट डाला जाता हैं | इस तरीके से एक चमकदार सिल्वर धातु प्राप्त होती है | 

Electrolytic Method

                  यह सिल्वर रिकवरी का दूसरा तरीका है | इस पद्धति के द्वारा सेमी ऑटोमेटिक या फुली ऑटोमेटिक मशीन के द्वारा सिल्वर एक्सट्रेक्ट किया जा सकता है | इस मशीन में एक बड़ा टैंक होता है जिसमे दो इलेक्ट्रोड,एनोड तथा कैथोड लगे होते है | इसमें काम में लिया जाने वाला एनोड, कार्बन या ग्रेफाइट का बना होता है, तथा कैथोड एक बड़ी स्टेनलेस स्टील या दूसरी मिश्र धातु की प्लेट का बना होता है | यह दोनों टैंक में लगे होते हैं, जिसमें वेस्ट फ़िक्सर सॉल्यूशन को डाला जाता है | इस मशीन को इलेक्ट्रिसिटी मशीन से कनेक्ट करके इसमें करंट प्रवाहित किया जाता है | मशीन काम करना शुरू करती है तथा सिल्वर कलेक्टिंग प्लेट पर एकत्रित होने लगता है | इस मशीन को तब तक ऑपरेट किया जाता है जब तक सारी सिल्वर कैथोड पर आकर एकत्रित न हो जाए | इसे प्लेट से  कर पिघला कर ईंटो के रूप में ढाल लेते है |






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LATENT IMAGE FORMATION

LATENT IMAGE


                     फोटोग्राफिक फिल्म पर उपस्थित सिल्वर हैलाइड ग्रेन छोटे क्रिस्टल के रूप में होता है जो  जिलेटिन में सस्पेंडेड अवस्था में होते हैं | यह क्रिस्टल सिल्वर आयन्स (Ag+), ब्रोमीन आयन्स (Br+) तथा आयोडीन आयन्स (I+) से बने होते हैं, तथा यह सभी आयन क्रिस्टल जालक या क्यूबिक लैटिस में व्यवस्थित रहते हैं |
LATENT IMAGE FORMATION

                          मेडिकल एक्सरे फिल्म में उपस्थित यह ग्रेन बहुत ही छोटे होते हैं, लेकिन फोटोग्राफिक फिल्म पर उपस्थित fine-graine की तुलना में यह काफी बड़े होते हैं | इनका औसत क्रिस्टल साइज 1 से 1.5 माइक्रोन के बीच में होता है |  प्रत्येक ग्रेन में 10 लाख से 1 करोड़ सिल्वर आयन होते हैं |

                       यह सिल्वर आयोडो ब्रोमाइड ग्रेन परफेक्ट क्रिस्टल नहीं होता है, क्योंकि परफेक्ट क्रिस्टल में कोई फोटोग्राफिक सेंसटिविटी नहीं होती है | इस क्रिस्टल में बहुत सारे क्रिस्टल डिफेक्ट होते हैं,  जिसमें एक है प्वाइंट डिफेक्ट | इसमें एक सिल्वर लाइन अपनी  नॉर्मल पोजीशन से बाहर निकलकर क्रिस्टल लैटिस में चला जाता है, यह इंटरस्टिशियल सिल्वर आयन क्रिस्टल में कहीं भी गति कर सकते हैं | सिल्वर आयन्स का यह डिसलोकेशन लाइन इंपरफेक्शन (line imperfection)  कहलाता है |

Read : X-ray film Emulsion 

                            यह सिल्वर आयन्स का डिस्लोकेशन ही एक्सरे फिल्म की लाइट सेंसिटिविटी का कारण होते हैं | इन क्रिस्टल की केमिकल सेन्सीटाइजेशन (chemical sensitization) को कई तरीकों से बढ़ाया जा सकता है | साधारणतया इसके लिए  इमल्शन में  एक सल्फर कंटेनिंग कंपाउंड जैसे कि एलील थायो यूरिया (allyl thio urea)मिलाया जाता है | यह सिल्वर  हैलाइड से क्रिया करके सिल्वर सल्फाइड बनाता है | यह सिल्वर सल्फाइड क्रिस्टल की सतह पर स्थित होता है तथा इसे सेंसटिविटी स्पेक (sensitivity speck) कहते हैं | यही सेंसटिविटी स्पेक एक इलेक्ट्रॉन ट्रैप करता है, तथा लटेंट इमेज का निर्माण प्रारम्भ करता है |


                          मैटेलिक सिल्वर ब्लैक कलर की होती है, तथा यह मैटेलिक सिल्वर ही x-ray फिल्म पर डार्क एरिया प्रोड्यूस करता है | फिल्म पर गिरने वाला लाइट फोटोन इमल्शन द्वारा एक अवशोषित कर लिया जाता है | यह  ऊर्जा अवशोषित कर ब्रोमीन आयन अपने एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकाल देता है |

Br- + light photon → Br + electron

                       यह इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल में काफी दूर तक गति कर सकता है, तथा लाइन इंपरफेक्शन या सेंसटिविटीज स्पेक पर जाकर यह इलेक्ट्रॉन ट्रैप हो जाता है | यह इलेक्ट्रॉन सेंसटिविटीज स्पेक को एक नेगेटिव चार्ज दे देता है | यह सेंसिटिविटी स्पेक का इलेक्ट्रान अब क्रिस्टल लेटेस्ट में उपस्थित मोबाइल इंटरस्टिशल सिल्वर आयन को अट्रैक्ट करता है | सेंसिटिविटी स्पेक पर यह इलेक्ट्रॉन पाकर सिल्वर आयन न्यूट्रल हो जाता है, तथा सिल्वर एटम में परिवर्तित हो जाता है |
Ag+ + electron → Ag

                             अब यह सिल्वर एटम एक इलेक्ट्रॉन ट्रैप की तरह व्यवहार करता है, तथा दूसरे इलेक्ट्रॉन को ट्रैप कर लेता है | यह इलेक्ट्रान दोबारा एक सिल्वर आयन को आकर्षित करता है | इससे इस सेंसटिविटी स्पेक पर खूब सारे सिल्वर एटम आते हैं,  तथा उनका यूटिलाइजेशन हो जाता है | यह सेंसिटिविटी स्पेक पर इलेक्ट्रान ट्रैप होने को Gurney-Mott  Hypothesis से समझाया जाता है |   नेगेटिव ब्रोमाइड आयन जिससे इलेक्ट्रॉन बाहर निकल जाता है, उदासीन ब्रोमीन में परिवर्तित हो जाती है, जो क्रिस्टल से बाहर निकल कर इमल्शन में आ जाती है |
LATENT IMAGE FORMATION

                             वो क्रिस्टल जिनमें सेंसटिविटी स्पेक पर मैटेलिक सिल्वर बन जाता है, लेटेंट इमेज सेंटर (latent image center) कहलाते है तथा इन्हे एक्सपोज्ड सिल्वर हैलाइड ग्रेन कहते है | एक सिल्वर हैलाइड ग्रेन पर एक से ज्यादा लेटेंट इमेज सेंटर का निर्माण हो सकता है , लेकिन अभी इन मैटेलिक सिल्वर एटम के द्वारा फिल्म पर कोई विजिबल चेंज नहीं दिखाई देता हैं,  अथार्थ फिल्म ब्लैकनिंग शुरू नहीं हुई होती है | किसी भी सिल्वर हैलाइड ग्रेन डेवेलप होने योग्य बनाने के लिए जरूरी है कि उस पर कम से कम 2 लेटेंट इमेज सेंटरउपस्थित हो  | लेटेंट इमेज सेंटर पर जितने ज्यादा सिल्वर एटम होंगे, उसकी डेवलप होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है | कुछ लेटेंट इमेज सेंटर पर कई सौ सिल्वर एटम्स होते हैं |







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CONSTRUCTION OF X RAY FILM

X-RAY FILM CONSTRUCTION

           X-ray फिल्म फोटोग्राफिक फिल्म होती है जिसमें photographically active या radiation sensitive emulsion होता है जो कि साधारणतया है एक ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक शीट जिसे base कहते हैं के दोनों साइड में कोट किया होता है | फिल्म बेस को इमल्शन से एक एडहेसिव लेयर की सहायता से अच्छे से जोड़ दिया जाता है तथा इमल्शन को मैकेनिकल डैमेज से बचाने के लिए इस पर एक कोटिंग की जाती है जिसे सुपर कोटिंग कहते है | 
CONSTRUCTION OF X RAY FILM

Film Base

          फिल्म बेस का एकमात्र कार्य भंगुर (fragile) फोटोग्राफिक इमल्शन को सपोर्ट प्रदान करना है एक फिल्म बेस  में निम्न तीन विशेषताएं होनी चाहिए 
  • इसके द्वारा कोई विजिबल पैटर्न उत्पन्न नहीं होना चाहिए अथार्थ इसके द्वारा बहुत ज्यादा लाइटअब्जॉर्ब नहीं होनी चाहिए अथार्थ जब रेडियोग्राफ को देखा जाता है तो बहुत ज्यादा लाइट अब्जॉर्ब नहीं होनी चाहिए | 
  • इसकी flexibility, thickness तथा strength ऐसी होनी चाहिए की फिल्म को develop करने में आसानी हो | 
  • बेस डाइमेंशनल स्टेबल होना चाहिए ताकि फिल्म को डिवेलप करने के दौरान तथा उसको स्टोर करने के दौरान इसकी साइज तथा शेप परिवर्तित नहीं होनी चाहिए | 
             ओरिजिनल एक्सरे प्लेट में ग्लास की प्लेट होती थी जिसके एक साइड में इमल्शन का लेप किया होता था |  फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के शुरुआत में बेल्जियम ने जब फोटोग्राफिक ग्लास की सप्लाई को बंद कर दिया तो एक लेस फ्रेगाइल एक्स-रे फिल्म बेस की मांग उठने लगी | 1914 में cellulose nitrate को फोटोग्राफिक फिल्म में बेस की तरह उपयोग में लिया जाता था | सेल्यूलोज नाइट्रेट ज्वलनशील पदार्थ होता है अतः 1924 में cellulose triacetate ( सेलुलोज ट्राइएसीटेट) बेस को डेवेलप किया गया | 1960 में सबसे पहला polyester base की बनी मेडिकल रेडियोग्राफिक फिल्म इंट्रोड्यूस की गई | पॉलिएस्टर बेस में dimensional stability ( डाइमेंशनल स्टेबिलिटी) बहुत ज्यादा होती है | सेलुलोज ट्राइएसीटेट तथा पोलिस्टर बेस कलर लेस होते थे | अतः 1933 में सबसे पहले x-ray फिल्म बेस में blue tine (ब्लू टिंट)  दिया गया | जिससे इन्हें देखने में आसानी होती है तथा आई स्ट्रेन कम होता है |  आजकल अक्सर फिल्म ब्लू टिंटेड होती है यह dye फिल्म बेस या इमल्शन में डाली जाती है | cellulose triacetate base की थिकनेस पॉइंट 8 माइल्स होती है ( 0.01mil = 1in.) | जबकि पॉलिएस्टर बेस की थिकनेस 7 माइल होती है |


Adhesive

                फोटोग्राफिक इमल्शन को फिल्म बेस पर सीधे ही नहीं लगाया जाता है इसके लिए इनके बीच में एक एडहेसिव पदार्थ लगाया जाता है जो इन दोनों को आपस में जोड़ने का काम करता है | 

Emulsion

          एक्सरे फिल्म इमल्शन के दो महत्वपूर्ण भाग जिलेटिन तथा सिल्वर हैलाइड होते हैं | अधिकांश एक्सरे फिल्म इंटेंसिफाइंग स्क्रीन के साथ काम करने के लिए बनी होती है तथा इनके दोनों साइड में इमल्शन की कोटिंग की जाती है | इमल्शन थिकनेस फिल्म टाइप के अनुसार परिवर्तित होता रहता है लेकिन यह 0.5 माइल से कभी भी ज्यादा नहीं होता क्योंकि इसे ज्यादा होने पर लाइट डीप लेयर को भेद (penitration)  नहीं कर पाती है | 

Gelatin

           फोटोग्राफिक जिलेटिन को bones  के द्वारा बनाया जाता है तथा यह अधिकतर केटल बोंस के द्वारा इंडिया तथा अर्जेंटीना में बनाया जाता है | दूसरे सस्पेंशन मीडियम की बजाय जिलेटिन को लेने के बहुत से कारण है-
Also Read: Constituents of Developer and Fixer
  • यह सिल्वर हैलाइड  ग्रेन को फैलाए हुए रखता है तथा यह सिल्वर हैलाइड ग्रेन के एकत्रीकरण (clumping) को रोकता है | 
  • प्रोसेसिंग सॉल्यूशन जैसे डेवलपिंग एंड फिक्सिंग सॉल्यूशन जिलेटिन को इसकी स्ट्रैंथ को बिना खराब किए हुए आसानी से भेद सकते हैं | 
  • जिलेटिन बहुत अधिक मात्रा में और एक समान क्वालिटी में पाया जा सकता है |  

Silver Halide


          सिल्वर हैलाइड एक्सरे फिल्म में लाइट सेंसिटिव केमिकल होता है | X-ray फिल्म में 90 से 99% सिल्वर ब्रोमाइड(KBr) होता है तथा 1 से 10 % तक सिल्वर आयोडाइड (AgI) होता है |  सिल्वर आयोडाइड को मिलाने से AgBr इमल्शन की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है |  यह सिल्वर आयोडो ब्रोमाइड क्रिस्टल्स जिलेटिन में अवकक्षेपित (pricipitated) तथा emulsified हो होते हैं जिसके लिए उच्च स्तर की कंसंट्रेशन तथा टेंपरेचर की आवश्यकता होती है | 

Super Coating

            इमल्शन लेयर को जिलेटिन की एक पतली लेयर से कवर किया जाता है जिसे सुपर कोटिंग कहते हैं  | यह इमल्शन कोमैकेनिकल डैमेज से बचती है |  इसलिए अर्कोइसको anti abrasive coating भी कहते हैं | इसमें कुछ ऐसे सब्सटांस मिलाए जाते हैं जो फिलम सरफेस को स्मूथ तथा स्लीक बनाते है |







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Film Processing Chemicals

CONSTITUENTS OF DEVELOPER AND FIXER

Developer

Developing agent

           डेवलपर Hydroquinone, Phenidone or Metol का बना होता है |  यह शार्प  इमेज बनाता है | डेवलपर एक reducing agent की तरह कार्य करता है |  यह एक बेंजीन रिंग प्रोडक्ट होता है, जो एक्सपोज्ड सिल्वर हैलाइड को मैटेलिक सिल्वर हेलाइड में परिवर्तित करता है | आजकल Metol की जगह Phenidone काम में लिया जाता है | 
ingradients of developer and fixer

Alkalizer

          अल्कलाइजर जिसे Accelerator भी कहते हैं इसके लिए सोडियम कार्बोनेट काम में लिया जाता है जिसका केमिकल फार्मूला Na2CO3 होता है | यह डेवलपिंग सॉल्यूशन में एल्कलाइन मीडियम प्रोवाइड करवाता है | डेवलपर सॉल्यूशन इसी एल्कलाइन मीडियम में कार्य करता है तथा यह जिलेटिन इमल्शन को सॉफ्ट व स्वैलो (swells) बनाता है | यह सिल्वर  क्रिस्टल को अट्रैक्ट करता है | 

Preservative

डेवलपर सॉल्यूशन में प्रिजर्वेटिव के रूप में सोडियम सल्फाइट काम में लिया जाता है | यह डेवलपर सॉल्यूशन के ऑक्सीडेशन को कम करता है जिससे दूसरे केमिकल्स की स्ट्रैंथ प्रिजर्व रहती है |  अगर यह नहीं होता है तो दूसरे केमिकल्स की स्ट्रेंथ बहुत तेजी से कम होती जाती है जिससे सॉल्यूशन डार्क कलर का हो जाता है | 

Restrainer

रिस्ट्रेनर के रूप में पोटेशियम ब्रोमाइड काम में लिया जाता है यह दूसरे डेवलपिंग एजेंट की स्ट्रैंथ को रिस्ट्रेन या नियंत्रित करता है | अगर रिस्ट्रेनर डेवलपिंग सोल्युशन में उपस्थित नहीं होता है तो डेवलपिंग एजेंट अनएक्सपोज्ड सिल्वर हैलाइड को भी डेवेलप कर देता है जिससे फिल्म पर सिल्वर हैलाइड फॉग के रूप में डिपॉजिट हो जाता है |

Vehicle

यह सॉल्वेंट के रूप में उपयोग होता है, तथा डेवलपर केमिकल्स हो रिएक्शन करने के लिए एक माध्यम उपलब्ध करवाता है, तथा यह जिलेटिन को भी सॉफ्ट बनाता है | 
डेवलपिंग रिएक्शन तब तक नहीं होती है जब तक कि कोई अल्कलाइजर उपस्थित ना हो | यह अल्कलाइजर रिएक्शन के लिए डोर्स को ओपन करता है तथा डेवलपिंग एजेंट को इमल्शन के पोर्स (pores)  में एंटर होने के लिए परमिट करता है | 
अगर डेवलपिंग टैंक को ढक्क कर ना रखा जाए तो प्रिजर्वेटिव बहुत जल्दी ऑक्सीडेशन के द्वारा खत्म हो जाता है  इसके अलावा डेवलपिंग सॉल्यूशन में एक फंगीसाइड मिलाया जाता है, जो  डेवलपर में फंगस फॉरमेशन को कम करता है |  इसमें एक बफर सॉल्यूशन भी मिलाया जाता है जो डेवलपर की पीएच (Ph) को मेंटेन करता है |