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INTERACTION OF RADIATION WITH MATTER




जब X-rays तथा Gamma-rays किसी object पर गिरती है, तो उनमे से कुछ photon matter के particles (electron, proton)  से क्रिया करते है, तथा उनकी energy, या तो absorb हो जाती है या scatter |  Photon का यह absorption या scattering, attenuation कहलाता है |  शेष photon किसी matter के पार्टिकल से बिना interaction किये सीधे उसे पार करके चले जाते है |
किसी material से transmit होने वाले फोटोन की संख्या उस मटेरियल की thickness, density, material के atomic number तथा प्रत्येक फोटोन की एनर्जी पर निर्भर करती है |
किसी Ionising radiation की matter से इंटरेक्शन होने पर चार तरह की reaction की सम्भावना होती है |  
INTERACTION OF RADIATION WITH MATTER

  1. COHERENT SCATTERING -Radiography/Radiotherapy में.........Read More
  2. PHOTOELECTRIC EFFECT - यह एक all or none........Read More
  3. COMPTON EFFECT- इस इफ़ेक्ट में photon..........Read More
  4. PAIR PRODUCTION- यह एक energy का mass में.......Read More
इन चारो इफ़ेक्ट से निम्न conclusion निकलता है -

  1. जब absorption Photoelectric effect के द्वारा होता है तो bone, soft tissue से ज्यादा एनर्जी absorb करती है  ( 6 गुना तक ज्यादा )  |
  2. Compton effect की स्थिति में Bone तथा soft tissue per gram समान ऊर्जा अवशोषित करते है | 
  3. अगर absorption केवल Pair production के द्वारा होता है तो Bone, Soft Tissue की तुलना में दुगुनी ऊर्जा अवशोषित करती है | 

Energy Effect
UP to 50 KeV Photo Electric Effect
60-90 KeV Photo Electric Effect + Compton Effect
200KeV-2 MeV Compton Effect
5 MeV-10 MeV Pair Production begins to important
50 MeV-100 MeV Pair Production most important

PAIR PRODUCTION




Pair production एक energy का mass में conversion का उदहारण होता है |  इसके लिए threshold energy 1.02 MeV होती है | जब एक photon जिसकी ऊर्जा, इस ऊर्जा से अधिक होती है किसी atom के nucleus के field के पास आता है तो यह गायब हो जाता है तथा एक electron-positron pair उत्पन्न होता है |  यह प्रभाव pair production कहलाता है | 
PAIR PRODUCTION

यह 1.02 MeV energy का उपयोग electron-positron pair को उत्पन्न करने में तथा शेष energy इन दोनों particles में समान रूप से स्थानान्तरित हो जाती है जिससे वो दोनों एक दूसरे के opposite direction में गति करते है | 


यधपि Pair production के लिए threshold energy 1.02 MeV  होती है, लेकिन यह तब तक नहीं पाया  जाता है जब तक की दोनों particle को kinetic energy देने के लिए पर्याप्त एनर्जी न हो | सामान्यतया  2 MeV से कम energy पर Pair production नहीं पाया जाता है |   Pair production atomic number (Z) पर निर्भर करता है | 
Pair Production ∝ Z2


English translation of article

Pair production is an example of conversion of an energy into mass. The threshold energy for this is 1.02 MeV. When a photon whose energy is greater than this energy comes near the field of nucleus of an atom, it disappears and an electron-positron pair is generated. This effect is called pair production.

This 1.02 MeV energy is used to generate electron-positron pair and the remaining energy is transferred equally between these two particles, so that both of them move in opposite direction of each other.
Although the threshold energy for Pair production is 1.02 MeV, this effect is not found until there is enough energy to give kinetic energy to both the particles. Pair production is generally not found on energy less than 2 MeV. Pair production depends on the atomic number (Z).
                                                    Pair Production ∝ Z2



COMPTON EFFECT




Compton effect में photon atom के free electron से interact करता है तथा उसे केवल अपनी एनर्जी का कुछ भाग ऑर्बिट से बाहर निकालने (Eb) तथा Kinetic Energy (Ek) के रूप में देता है |  शेष energy के साथ incidnet photon { h𝒗 - (Eb + Ek)} एक दूसरी दिशा में  चला जाता है तथा दूसरे एटम से interaction करता है |
COMPTON EFFECT

यह Compton electron तथा Scattered photon दो प्रोडक्ट बनते है | Compton Effect पर परमाणु क्रमांक Z का कोई इफ़ेक्ट नहीं पड़ता है | अतः body में high तथा low atomic number maetrial की स्थिति में Compton effect एक समान होती है | 


अतः Cobalt gamma rays तथा high energy X-rays (4MV to 20MV) की स्थिति में energy absorption मुख्यतया compton process से ही होता है | यह Supervoltage Radiation का Orthovoltage Radiation पर एक advantage होता है | जैसे जैसे एनर्जी बढ़ती जाती है, Compton effect के कारन energy absorption घटता चला जाता है, तथा यह 1/E के समानुपाती होता है |





COHERENT SCATTERING




COHERENT SCATTERING

Radiotheray / radiology में यह effect ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता है | जब interaction करने वाला photon, target atom के orbital electron के पास से गुजरता है, तो ये occilation करने लगते है |  इसके परिणाम स्वरुप incident photon के समान आवर्ती की ऊर्जा का उत्सर्जन होता है | 
यहाँ incident beam का बिना किसी energy loss के scattering होती है अर्थात फोटोन अपनी डायरेक्शन बदल लेता है |  यह परिघटना high atomic number तथा low photon energy की अवस्था में ज्यादा होती है | 


Note  
Bound electron
जब photon की ऊर्जा interating electron  के बराबर या थोड़ी सी ज्यादा होती है तो bound या बद्ध इलेक्ट्रान कहलाता है | 
Free Electron
जब photon की ऊर्जा interacting electron से बहुत ज्यादा हो तो free electron कहलाता है | 



PHOTOELECTRIC EFFECT




PHOTOELECTRIC EFFECT

यह एक all or none phenomenon होता है | इस interaction में incident photon orbit के bound electron से क्रिया करता है | इस समय फोटोन की ऊर्जा के एक भाग का उपयोग  इलेक्ट्रॉन (BE = EB) को ऑर्बिट से बाहर निकालने में होता है, तथा बाकी ऊर्जा (h𝒗 - EB) इलेक्ट्रॉन को kinetic energy के रूप में दे दी जाती है | 
इस प्रकार photon गायब हो जाता है तथा एक photoelectron उत्पन्न होता है | इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के द्वारा उत्पन्न वैकेंसी को outer shell electron के द्वारा भरा जाता है तथा Characteristic X rays उत्पन्न होती है |   
Absorber के atomic number के बढ़ने के साथ साथ photoelectric effect बढ़ता है | 
PE ∝ Z3
अर्थात higher Z material लेने पर ऊर्जा का अवशोषण ज्यादा होता है | अतः रेडियोथैरेपी में Bones, Soft Tissue तथा Muscle की तुलना में ज्यादा ऊर्जा का अवशोषण करती है | इसलिए Orthovoltage Therapy में Bone Necrosis को कम करने के लिए Bone Shielding की जाती है | Photon की enargy बढ़ने के साथ-साथ Photoelectric Effect कम प्रभावी होता है, क्योंकि इससे अधिक इलेक्ट्रॉन, मुक्त इलेक्ट्रॉन की तरह व्यवहार करने लगते हैं |
Note  
Bound electron
जब photon की ऊर्जा interating electron  के बराबर या थोड़ी सी ज्यादा होती है तो bound या बद्ध इलेक्ट्रान कहलाता है | 
Free Electron
जब photon की ऊर्जा interacting electron से बहुत ज्यादा हो तो free electron कहलाता है |






Equivalent Dose




     यधपि सभी ionizing radiation के लिए किसी medium में absorbed dose को per unit mass के द्वारा absorb की गई ऊर्जा जूल प्रति किलोग्राम (J/kg) में मापा जाता है । लेकिन अलग-अलग प्रकार के रेडिएशन के समान या equivalent dose के द्वारा उत्पन्न biologiacl effect एक समान नहीं होते है | 
image show alpha beta and gamma radiaiton

     यह अलग-अलग रेडिएशन के द्वारा उत्पन्न होने वाले बायोलॉजिकल इफ़ेक्ट में अंतर रेडिएशन  के कारण माध्यम में होने वाले specific ionization में अंतर के कारण होता है । अथार्थ अलग-अलग रेडिएशन के कारन माध्यम में specific ionization अलग-अलग होता है |

आयोनीज़िंग रेडिएशन के द्वारा उत्पन्न बायोलॉजिक इफ़ेक्ट का पता लगाने के लिए एक पृथक यूनिट sievert (Sv) define की गई |  
1 Sievert = 1J/kg
   यह biological effect उत्पन्न करने वाला dose, Equivalent dose कहलाता है । Sievert, dose measurement की यूनिट होती है।  यह equivalent dose रेडियोथेरेपी के विषय में यह radiation protection के लिए महत्वपूर्ण होता है । इसकी conventional unit, rem होती है | 

      Equivalent dose तथा Absorbed dose में संबंध दर्शाने के लिए हाई ICRP ने एक radiation weighting factor (Wr) प्रतिपादित किया | यह बायोलॉजिकल डैमेज उत्पन्न करने वाले रेडिएशन के डोज की relative effectiveness को प्रदर्शित करता है | 
Absorbed dose तथा radiation weighting factor के गुणनफल को Equivalent dose कहते हैं | 
Dose equivalent (rem) = Wr X rad
यदि absorbed dose Gy में प्रदर्शित किया जाये तो equivalent dose sievert में प्रदर्शित किया जाता है | 
Sv = Wr X Gy
     Wr एक विमारहित या dimensionless राशि होती है तथा यह LET पर निर्भर करता है | X-ray तथा Gamma ray के लिए Wr का मान 1 होता है | Thermal neutron के लिए Wr का मान 5 होता है | Fast neutron तथा heavy particle (ɑ-particle) के लिए Wr का मान 20 होता है | High LET radiation ज्यादा biological damage उत्पन्न कर सकते है अतः उनका Wr अधिक होता है | 

KERMA




Kinetic Energy Released in Medium (KERMA)

किसी X-Ray photn का किसी मीडियम में इनिशियल इंटरेक्शन KERMA कहलाता है | जब X तथा 𝝲 - ray  किसी मीडियम से पास होते हैं तो वे अपनी काइनेटिक एनर्जी चार्जड पार्टिकल इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटोन को स्थानांतरित कर देते हैं | KERMA (K) चार्जड पार्टिकल को ट्रांसफर की गई ऊर्जा को बताता है | यह चार्ज पार्टिकल मीडियम में आगे ट्रै
kinetic energy released in medium
वल करते हैं तथा एनर्जी डिपॉजिट करते जाते हैं इस प्रोसेस के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉन एटम से इंटरेक्ट करके Bremsstrahlung Radiaiton उत्पन्न करते हैं तथा कुछ इलेक्ट्रॉन दूसरे इलेक्ट्रॉन से क्रिया करके 𝛅-rays  उत्पन्न करते हैं | Human body में केवल Bremsstrahlung ही significant होता है, 𝛅-rays की मात्रा बहुत कम होती हैं अतः इसे उपेक्षित कर दिया जाता है | 

इसका मात्रक जूल / किलोग्राम (J/Kg)होता है |  इसकी SI Gray होती है | इसकी स्पेशल यूनिट Rad होती है |जब reference material air होता है तो यह air kerma कहलाता है | 
1 air kerma (Gy) = 114R

EXPOSURE





      किसी radiation beam में उपस्थित ionizing photon की मात्रा को exposure कहते हैं | किसी माध्यम में ionizing photon की मात्रा का पता उनके द्वारा उत्पन्न आयन की संख्या से लगाया जाता है | एक्स्पोज़र का मापन करने के लिए एयर एक universal medium होता है |
One Roentgen shall be the quantity of X- or Gamma radiation such the associated corpuscular emission par 0.001293 gram of air (1 CC of dry air at STP), produces in air, ions carrying 1 e.s.u. of quantity of either sign.
एक Roentgen एक्स या गामा रेडिएशन की वह मात्रा है जिसके द्वारा एसटीपी पर  0.001293 ग्राम एयर से जुड़ा कॉरपस्कुलर एमिशन किसी भी चिन्ह की  1esu इलेक्ट्रिसिटी  प्रवाहित करें |
a man exposed with radiation


एक्सपोज़र की SI यूनिट Roentgen (R) होती है |  एक एक्स्पोज़र यूनिट फोटोन कि वह मात्रा है जो 1 किलोग्राम एयर में एक कूलाम चार्ज उत्पन्न करें | 
1R = 2.58 X 10-4 C/Kg of Air
रेडिएशन मॉनिटर डिवाइस को रोंजन या मिली रोंजन में callibrate किया जाता है | x-ray मशीन के आउटपुट को mR/mAs से मापा जाता है | जैसे- एक 75Kv, X-ray मशीन जिसका फिल्ट्रेशन 2mm Al हो, 100cm distance पर 5mR/mAs का आउटपुट देती है |
exposure a radiation measurement unit roentgen

एक ionization chamber जिसमे air भरी हो से  एक्सपोज़र का मापन आसान होता है |  Air तथा soft tissue का effective atomic number लगभग सामान होता है |  अतः diagnostic X-ray energy में मापा गया एक्सपोज़र soft tissue के सामान होता है |  एक्सपोज़र केवल एयर में एक्सरे तथा गामा रेडिएशन के लिए ही परिभाषित किया जाता है |


UNIT OF RADIOACTIVITY





किसी radionuclide में उपस्थित unstable nucleus संख्या activity कहलाती है | यह न्यूक्लियस radio-disintegraion
के द्वारा स्टेबिलिटी प्राप्त करते हैं | किसी रेडियोएक्टिव मैटेरियल से निकलने वाला रेडिएशन उसकी एक्टिविटी के सीधे
समानुपाती होता है |
अतः एक्टिविटी से किसी यूनिट टाइम में निकलने वाली रेडिएशन की मात्रा का पता चलता है | इसका मात्रक curie (Ci)
होता है |
एक क्यूरी 1 ग्राम रेडियम 226 में होने वाले disintegration per second या विघटन प्रति सेकंड को बताता है |
1Ci = 3.7 X 1010 dps
इसके छोटे मात्रक मिली क्यूरी तथा माइक्रोक्यूरी भी उपयोग में लिए जाते हैं |
1mCi = 3.7 X 107 dps
1μCi = 3.7 X 104 dps
एक्टिविटी की SI UNIT becquerel होती है | 1 becquerel 1dps के बराबर होता है |
1Ci = 3.7 X 1010 dps

RADIOTHERAPY




WHAT IS RADIOTHERAPY

Radiotherapy is the treatment of disease primarily malignant tumors, using electromagnetic and particle radiations.
जब Radiation एक beam के रूप में बॉडी के बाहर से apply किया जाता है, इस स्थिति में से External Beam Radiotherapy कहते हैं | इसके अलावा Rdioactive source को body के अंदर रखकर भी Radiation दिया जा सकता है, Intracavitory/Intraluminal Radiotherapy  कहते हैं |  
Interstitial Radiotherapy  में Radioactive source को सीधे tissue में implant किया जाता है | 
Radioactive Fluids को कुछ disease में सीधे artery तथा vein के जरिये बॉडी में inject किया जाता है |

Aim of Radiotherapy 

Radiotherapy आमतौर पर प्रत्येक रोगी के treatment की आवश्यकता के अनुसार Radical या Palliative पद्धति से दी जाती है |

Radical Treatment 

किसी patient को उसकी disease को ठीक करने के लिए योजनाबद्ध(Planned) तरीके से दिया गया treatment, radical treatment कहलाता है | ऐसे पेशेंट के treatment में tratment area में tumor तथा उसके चारों और का वह एरिया जहां microscopic disease उपस्थित होती है, शामिल किया जाता है | इस तरह के treatment प्रकार में radiation beam को एक से अधिक direction से tumor पर डाला जाता है, तथा कई बार एक से अधिक प्रकार की radiotherapy (जैसे - Teletherapy या Brachytherapy) का उपयोग किया जाता है | इसमें दिया गया radiation dose बहुत अधिक होता है, जिससे side effects भी होते हैं, लेकिन ये side effects, treatment के लिए acceptable होते हैं | 

Palliative Treatment

Palliative radiotherapy का मकसद advanced cancer से उत्पन्न लक्षणों से पेशेंट को राहत देना होता है, जैसे अधिकांश lung cancer में यह treatment, radical treatment की तुलना में simple होता है, तथा यह कम टाइम के लिए दिया जाता है | Palliative treatment में पेशेंट को कम समय के लिए low dose दिया जाता है, ताकि कम से कम side effects उत्पन्न हो | 

How is Radiotherapy Administered

Radiation उत्पन्न करने वाली radiotherapy machine में यह विशेषता होती है, कि उसमें radiation निकलने वाली साइड में पेशेंट के ट्यूमर को सही से align किया जा सकता है | External beam radiotherapy में light field होता है, जो radiation field की तरह mimic करता है, तथा साथ ही पेशेंट की surface पर marks लगा दिए जाते हैं, जो यह radiation beam को apply किये जाने वाले field को indicate करते हैं, ताकि body की surface तथा deep स्थित tumor को ठीक किया जा सके |
Brachytherapy में guide tube होती है जिसके द्वारा radiation source को body cavity या tissue में डाला जाता है, तथा इस radioactive source को treatment के बाद निकाल लिया जाता है | Radiotherapy treatment, Radiotherapist के द्वारा निर्धारित किया जाता है |
Treatment के प्रत्येक कोर्स में अलग अलग संख्या में fraction या dose दिये जाते है, तथा प्रत्येक एक निश्चित दिन पर दिया जाता है | सामान्यतः रेडियोथैरेपी में प्रत्येक दिन एक fraction दिया जाता है | Treatment start करने से पूर्व tissue को localize कर लिया जाता है तथा एक उपयुक्त treatment schedule को कैलकुलेट किया जाता है, जिसे Radiotherapy Treatment Planning कहते हैं | इसके द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि ट्यूमर को planned treatment accurate दिया जाये |  यही radiotherapy treatment तथा therapeutic radiography का आधार है | 

Radiotherapy treatment option

पेशेंट को उसकी malignant disease के लिए कई प्रकार के radiotherapy treatment option दिए जाते हैं | एक पेशेंट को एक या एक से अधिक treatment modality के द्वारा treat किया जा सकता है | दूसरी सहायक (Adjuvant) थेरेपी जैसे Chemotherapy को radiotherapy के साथ सम्मिलित(combine) किया जा सकता है |
अधिकांश radiotherapy treatment में अलग-अलग ऊर्जा की External beam X-rays का उपयोग किया जाता है |  जिनके लिए कई प्रकार की मशीन उपलब्ध है, कुछ डिपार्टमेंट में electron beam का भी treatment के उपयोग किया जाता है | कुछ विशेष परपज के लिए ऐसी मशीन उपयोग में ली जाती है जो treatment के लिए 𝛄-rays उत्पन्न करने वाले radioactive isotope को उपयोग में लाती है | इसके अलावा external beam particle therapy भी ट्रीटमेंट के लिए उपयोग में लिया जाता है | 

THERMOLUMINESCENT DOSIMETER | TLD





 

TLD को Personnel Monitoring Device के रूप में उपयोग में लिया  हैं | यह किसी इंडिविजुअल का X, 𝜷, 𝛄 रेडिएशन डोज़ मापन करता हैं | क्योकि यह Extreme Cliamatic Condition में भी इसके डाटा फेड नहीं होते हैं अतः इसके रिजल्ट विश्वसनीय होते हैं |
TLD CARDS
TLD CARDS

साधारणतया TLD Badge में एक प्लास्टिक कैसेट होती हैं जिसमे निकल कोटेड एल्युमीनियम कार्ड रखा होता हैं | इस कार्ड पर तीन CaSO4:Dy-Teflon की 0.8 mm मोटी व 13.2 mm व्यास की डिस्क लगी होती हैं | ये डिस्क कार्ड पर तीन 12mm व्यास के वृताकार छेद पर मैकेनिकली क्लिप की हुई होती हैं | Al कार्ड का डायमेंशन 52.5 mm X29.9 mm X 1 mm होता हैं | कार्ड के ऊपरी सिरे पर एक V आकार का कट लगा होता हैं ताकि ये कार्ड कैसेट में सदा एक निश्चित ओरिएंटेशन में रहे | कार्ड के पेपर रेपर में बंद रहता हैं, जिस पर यूजर के पर्सनेल डाटा तथा उसे उपयोग करने का पीरियड लिखा होता हैं | रेपर की थिकनेस 12mg/cm2 होती हैं जो स्किन सरफेस के निचे 10mm डेप्थ को बताता हैं | TLD डिस्क को गलत तरीके से उपयोग के दौरान नुकसान से बचने के लिए इसे रेपर के साथ एक पतली पॉलिथीन पाउच में सील  कर दिया जाता हैं | पाउच कार्ड को ओपन रेडियोएक्टिव सोर्स के साथ काम करते समय रेडियोएक्टिव कंटैमिनेशन से बचाता हैं |
TLD कैसेट हाई इम्पैक्ट प्लास्टिक की बानी होती हैं | इस पर तीन फ़िल्टर बने होते हैं जो प्रत्येक डिस्क सामने लगे होते हैं | जिनके नाम क्रमशः Cu+Al Filter, Perspex Filter तथा Open Filter होते हैं | ये फ़िल्टर कैसेट में आगे व पीछे कार्ड के दोनों और लगे होते हैं |  Cu+Al फ़िल्टर में 1mm Al तथा 0.9 Cu  होता हैं | Cu फ़िल्टर TLD डिस्क की और तथा Al फ़िल्टर रेडिएशन सोर्स की ओर  हैं | दूसरी डिस्क 1.5mm मोटे प्लास्टिक फ़िल्टर के बीच सैंडविच की हुई होती हैं | इसकी डेंसिटी 180mg/cm2 होती हैं | तीसरी डिस्क दो वृताकार ओपन विंडो के बीच लगी होती हैं | कैसेट पर एक क्लिप लगा होता हैं जो इसे यूजर के क्लोथ्स से अटैच करता हैं |

मैटेलिक फ़िल्टर एक्सरे तथा गामा रे  के मापन के लिए होता हैं | Perspex बीटा रेडिएशन के मापन के लिए होता हैं | जब TLD डिस्क  एक्सपोज़ होती हैं तो क्रिस्टल लैटिस के इलेक्ट्रान उत्तेजित होकर valance band से conduction band में चले जाते हैं | जहा वे conduction band के निचे ट्रैप हो जाते हैं | ट्रैप हुए इलेक्ट्रान की संख्या आपतित एक्सरे फोटोन की संख्या के समानुपाती होती हैं | इस तरह ये इलेक्ट्रान क्रिस्टल लैटिस में अवशोषित ऊर्जा स्टोर कर लेते हैं | 

TLD Reader

रेडिएशन एक्सपोज़र के बाद डोज़ का मापन TLD Reader सहायता से किया जाता हैं | रीडर मैं हीटर, फोटोमल्टीप्लायर ट्यूब (PMT), एम्पलीफायर तथा एक रिकॉर्डर लगा होता हैं | TLD डिस्क को हीटर कप में रखा जाता हैं जहा इसे reproducible heating cycle से गर्म किया जाता हैं | गर्म करने पर इलेक्ट्रान अपनी ग्राउंड स्टेट पर वापस आते है तथा स्टोर्ड एक्सेस एनर्जी को लाइट के रूप में उत्सर्जित करते हैं | यह उत्सर्जित लाइट PMT के द्वारा डिटेक्ट कर ली जाती हैं जो इसे एक इलेक्ट्रिकल करंट (सिग्नल) में कन्वर्ट कर देता हैं | इन PMT सिग्नल को एम्पलीफाई कर लिया जाता हैं तथा एक रिकॉर्डर के द्वारा माप लिया जाता हैं | रीडर को mR या mSv के रूप में कैलिब्रेट किया जाता हैं ताकि डायरेक्ट डोज़ मापा का सके | TLD डिस्क को बार बार उपयोग में लिया जा सकता हैं | इन्हे सैद्धांतिक रूप से 300 बार यूज़ में लिया जा सकता हैं | TLD Badge डोज़ मापन की 0.1 mSv से 100Sv तक वाइड रेंज मापन कर सकते हैं तथा इनकी एक्यूरेसी +/- 10% होती हैं | 
LiF भी TLD फॉस्फर के रूप में उपयोग में लिया जाता हैं, इसकी रेंज  10 mSv से 1000mSv तक होती हैं तथा एक्यूरेसी +/- 2% होती हैं | TLD बैज साधारणतया चेस्ट लेवल पर लीड एप्रन के भीतर लगाए जाते है | फ्लुरोस्कोपी के दौरान इसे कॉलर लेवल पर लेड एप्रन के भीतर पहना जाता हैं ताकि थाइरोइड व आई लेंस के डोज़ को मेजर(Measure) किया सके | प्रेग्नेंट रेडिएशन वर्कर को वैस्ट लेवल पर पहनने के लिए एक सेकंड TLD बैज दिया जाता हैं | यह लेड एप्रन के भीतर लगाया जाता हैं ताकि फीटल डोज़ को मेजर किया सके | न्यूक्लिअर मेडिसिन, ब्रैकीथेरेपी तथा इंटरवेंशनल रेडियोलोजी में एक एडिशनल रिस्ट बैज उपयोग में लाया जाता हैं |


EFFECTIVE DOSE UNIT | SIEVERT

सीवर्ट इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ़ यूनिट्स  (SI) में रेडिएशन मेज़रमेंट की इकाई है | क्योंकि एक्सरे, गामा रे तथा न्यूट्रॉन का जीवित ऊतक पर अलग अलग प्रभाव पड़ता हैं, सीवर्ट इस आयनिक विकरण के सापेक्ष जैविक प्रभाव (relative biological effectiveness-RBE) को ध्यान में रखता हैं |

EFFECTIVE DOSE UNIT | SIEVERT

एक सीवर्ट को साधारणतया विकिरण की उस मात्रा से लिया जाता हैं जो 1 Gray (100 rad) गामा रेडिएशन के द्वारा उत्पन्न बायोलॉजिकल इफेक्टिवनेस के बराबर प्रभाव उत्पन्न कर सके | सीवर्ट अलग अलग गणनाओ के लिए एक बड़ा मात्रक  होता हैं अतः इसका छोटा मात्रक मिलीसीवर्ट (mSv) काम में लिया जाता हैं जो एक सीवर्ट के 1/1000 वा भाग होता हैं  | एक ग्राम जीवित ऊतक में स्थानांतरित 10 erg ऊर्जा 1 mSv के बराबर होती हैं | 
              औसत व्यक्ति प्राकृतिक विकिरण जैसे रेडॉन गैस, कॉस्मिक किरणों से प्रति वर्ष लगभग 2.4 mSv प्राप्त करता है। चेस्ट सीटी स्कैन में 6.8 mSv की खुराक होती है। अमेरिकी परमाणु नियामक आयोग उन श्रमिकों को सीमित करता है जो 50 mSv की वार्षिक डोज़ पर रेडियोधर्मी सामग्री को संभालते हैं। (2011 में जापान में फुकुशिमा दाइची संयंत्र में आपातकाल के दौरान, वहाँ श्रमिकों के लिए अधिकतम स्वीकार्य डोज़ 250 mSv तक बढ़ा दी गई थी।) थोड़े समय में 1 Sv की डोज़ से एक्यूट रेडिएशन सिकनेस होती है, और 10 Sv की एक डोज़ घातक होती है।

CANCER




कैंसर 100 से अधिक विभिन्न बीमारियों का समूह हैं जो शरीर में कही भी विकसित हो  सकती हैं | मानव शरीर में कोशिकाये (cells)  शरीर की बेसिक यूनिट होती हैं | शरीर की आवश्यकता के अनुसार cells grow होती  हैं तथा divide होती हैं | cells के डैमेज होने या पुरानी होने पर मृत हो जाती हैं तथा उनके स्थान पर दूसरी cells आ जाती हैं | 

How does cancer starts ?


कार्सिनोजेनेसिस एक बहु-चरण प्रक्रिया है जिसमें सेल की आनुवंशिक सामग्री को नुकसान होने से सेल सामान्य से घातक में बदल जाता है। नुकसान धीरे-धीरे सेल के ग्रोथ रेगुलेटरी सिस्टम में जमा होता है।


कैंसर की शुरुआत एक आनुवंशिक दोष से होती है। मानव के आनुवांशिक कारक, जिसका अर्थ है जीन, कोशिका संरचनाओं में गुणसूत्र कहलाते हैं। जीन सेल कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जैसे कि उनका वितरण। यदि सेल की नियामक प्रणाली विफल हो जाती है, तो जीन परिवर्तन, या परिवर्तन से गुजर सकते हैं। एक एकल आनुवंशिक दोष आमतौर पर कैंसर का कारण बनने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। कैंसर तब विकसित होता है जब उत्परिवर्तन जीन में होते हैं जो कोशिका वृद्धि और विभेदन को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तथाकथित कैंसर जीन एक कोशिका के सामान्य कार्यों को नियंत्रित करने वाले जीन होते हैं लेकिन जो बस क्षतिग्रस्त होते हैं।
कैंसर जीन दो प्रकार के होते हैं:
Oncogene 
जो कैंसर पैदा करने वाले जीन हैं, जिनकी सक्रियता सेल ऊतक के एक बेकाबू वितरण का कारण बनती  है  | 
Tumour suppressor gene or Anti cancer Gene 
इनका कार्य बंद होने से tumour होता हैं | 
सेल्स में जेनेटिक मेटेरियल लगातार डैमेज होता रहता हैं | लेकिन अपनी बॉडी लम्बे समय में एक डिफेन्स सिस्टम डेवेलप कर लेती हैं जो की इस डैमेज को रिपेयर कर देता हैं | अगर यह सिस्टम ब्रेक हो जाता हैं तो डैमेज हुई सेल अनियंत्रित रूप से बढ़ना शुरू कर देती हैं तथा कैंसर का कारण बनती हैं | 

TYPES OF RADIOACTIVITY

 रेडियोएक्टिविटी  परिघटना हैं जिसमे कुछ तत्वों के नाभिक विकिरण उत्पन्न करते हैं | यह निम्न प्रकार की होती हैं-

RADIOACTIVE MATERIAL SHOWS RADIOACTIVITY

I. ALPHA DECAY

    Alpha एक मूलभूत पार्टिकल होता हैं | यह एक Helium नाभिक होता हैं जिसमें दो फोटोन होते हैं | जिससे इस पर +2 धनात्मक आवेश आ जाता हैं, तथा इसमें 2 न्यूट्रॉन होते हैं | इसका द्रव्यमान 4 amu होता हैं | यह रेडियोएक्टिविटी प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रेडियोएक्टिव मटेरियल में पायी जाती हैं | इसका सबसे अच्छा उद्धरण रेडियम हैं -
22688Ra→l22286Rn+l42He
रेडियम का एक अल्फा पार्टिकल के उत्सर्जन से रेडॉन गैस में विघटन होता हैं | यह रेडियम पैरेंट एटम कहलाता हैं तथा रेडॉन डॉटर एटम कहलाता हैं | अल्फा उत्सर्जन के कारण डॉटर एटम का एटॉमिक नंबर तथा परमाणु भार पैरेंट कम होता हैं | 

II. BETA DECAY

जब किसी नाभिक की अस्थिरता का कारण प्रोटोन की अधिकता हो तो न्यूट्रॉन का एक प्रोटोन तथा इलेक्ट्रान में विघटन हो जाता हैं | 
01n ------------>11P + -10e

यह  इलेक्ट्रान नाभिक से बाहर निकल जाता हैं तथा प्रोटोन नाभिक में ही रहता हैं | 
1532P à 1632S + -10e
यहाँ डॉटर एटम का एटॉमिक नंबर बढ़ जाता हैं, तथा एक नए तत्व का निर्माण होता हैं | 


III. PROTON DECAY

जब नाभिक मैं न्यूट्रॉन की अधिकता होती हैं तो वे β-1 पार्टिकल उत्सर्जित करके स्थिर( STABLE) हो जाते हैं | इसी तरह अगर नाभिक में न्यूट्रॉन की कमी हो जाती हैं तो वे पॉज़िट्रान का उत्सर्जन करके स्थिरता प्राप्त करते हैं | 
11p à 01n + +10e
Ex.-                                                            611C à 511B + +10e

IV. GAMMA EMISSION

कुछ केसेस में β-1 या β+1 उत्सर्जन से नाभिक  की रेडियोएक्टिव डीके (decay) प्रोसेस पूरी हो जाती हैं, लकिन ऐसे बहुत से विघटन में डॉटर नाभिक के पास बहुत साडी एनर्जी होती हैं जिससे यह उत्तेजित अवस्था में रहता हैं, तथा यह शीघ्रता से इस एनर्जी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के रूप में उत्सर्जित कर देता हैं  जिसे गामा रेज़ (Gamma Rays) कहते हैं | 
2760Co à 2860Ni + -10e
 यहाँ 2760Co  का विघटन 2860Ni  में होता हैं तथा दो अलग-अलग एनर्जी के गामा फोटोन उत्सर्जित होते हैं जिनकी ऊर्जा 133 MeV तथा 1.17 MeV होती हैं |  Gamma emission कभी भी अकेला नहीं होता हैं यहाँ सदा K-capture, β-1 or β+1 डीके या alpha emission के बाद स्टेबिलिटी प्राप्त करने को एक follow up process होता हैं | 

V. K-ELECTRON CAPTURE

Nuclear stability का एक वैकल्पिक रूप K-electron capture होता हैं | इसमें नाभिक अपने बहुत पास स्थित K-shell electron को आकर्षित कर लेता हैं तथा proton का neutrilization कर लेता हैं | 

 11p + +10e  à 01n 
यहाँ उत्पन्न K-electron vacancy को characteristic radiation के उत्सर्जन से भरा जाता हैं | 
55131Cs  à 54131Xe + K-radiation  

VI. ANNIHILATION RADIATION

इलेक्ट्रान की तुलना में प्रोटोन बहुत ही दुर्लभ पार्टिकल होता हैं, तथा उत्सर्जित होने पर ये तुरंत ही इलेक्ट्रान से Combine (जुड़ जाता हैं ) हो जाता हैं , तथा दोनों पार्टिकल अद्रश्य हो जाते हैं तथा उनके द्रव्यमान दो फोटोन के रूप में कनवर्टेड हो जाते हैं जिनमे प्रत्येक की एनर्जी 0.51 MeV या इससे अधिक होती हैं जो की प्रोटोन की एनर्जी पर निर्भर करती हैं | यह प्रक्रिया annihilation radiation कहलाती हैं तथा यह सदा प्रोटोन एमिशन के दौरान घटित होती हैं | 

VII. GEOMETRIC TRANSITION

दो एटम जिनका परमाणु क्रमांक तथा परमाणु भार सामान होता हैं लकिन जिनका ऊर्जा स्तर अलग अलग होता हैं Isomer कहलाते हैं | 
जैसे 4399mTc metastable state होती हैं यह 4399Tc से 140 KeV का गामा रेडिएशन उत्सर्जित करके स्थिरता प्राप्त करता हैं | 
4399mTc à 4399Tc + ϒ 





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